सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए अंतिम मतदाता सूची की समयसीमा एक सप्ताह बढ़ा दी। ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई में 14 फरवरी की डेडलाइन आगे खिसका दी गई।
राज्य को 8505 ग्रुप बी अधिकारियों को ईआरओ के पास तैनात करने का आदेश। चुनाव आयोग इनका उपयोग कर सकता है, लेकिन भूमिका सहायक रहेगी।
ऑब्जेक्शन फॉर्म जलाने की घटनाओं में पुलिस निष्क्रियता पर डीजीपी को नोटिस। हलफनामा दाखिल करने को कहा गया।
वकीलों की आपसी बहस से सीजेआई सूर्यकांत भड़के। व्यवस्था बहाल कर श्याम दिवान ने पेशी की। ड्राफ्ट में 70 लाख नामों की गड़बड़ी और मैनपावर कमी का जिक्र।
राज्य ने 8500 अधिकारियों की व्यवस्था का दावा किया, आयोग ने इनकार किया। सिंघवी ने आयोग की पूर्व मांग न होने का हवाला दिया।
मनोज पंत ने सूची का ब्योरा दिया- ग्रुप ए, बी, सी के मिश्रण से। कोर्ट ने बदलाव की अनुमति दी, ट्रेनिंग का प्रावधान किया।
अंतरिम निर्देशों में सहयोग पर जोर। प्रक्रिया में देरी संभव लेकिन गुणवत्ता सुनिश्चित। मतदाता अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता।
यह कदम चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।