भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। दस वर्षों में मछली उत्पादन दोगुना हो चुका है और 4.76 लाख केसीसी के जरिए 3,214 करोड़ रुपये वितरित हो चुके हैं। सरकार ने सोमवार को इस उपलब्धि की जानकारी दी।
2018-19 से चली केसीसी योजना मछुआरों को 7 प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालिक ऋण देती है, जो समयबद्ध भुगतान पर 4 प्रतिशत तक कम हो जाता है। जलीय कृषि विकास कोष से 6,369 करोड़ के 178 ऋण मंजूर हो चुके हैं।
एनएबीएआरडी का 750 करोड़ गारंटी कोष बैंकों को निडर बनाता है, जो 12.5 करोड़ तक के असुरक्षित ऋणों की गारंटी लेता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने 12 बैंकों से जुड़कर 19,000 आवेदनों पर काम किया, 350 को मंजूरी दी और छोटे-बड़े ऋण बांटे।
2024-25 में 197 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जो 2013-14 से दोगुना है। 2026 का लक्ष्य 220 लाख टन है, जो तीन करोड़ रोजगार देगा। 2025 में झींगा निर्यात से 62,408 करोड़ की कमाई, अमेरिका-चीन प्रमुख गंतव्य।
यह क्षेत्र कृषि मूल्य सृजन में 7.26 प्रतिशत का हिस्सा है। प्रमुख उत्पादों पर जीएसटी 5 प्रतिशत होने से आंतरिक व बाहरी बाजार मजबूत हुए। मत्स्य क्रांति भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ा रही है।