राजधानी में सियासी तापमान अचानक चढ़ गया है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के वीर सावरकर को भारत रत्न देने के बयान के बाद विपक्ष ने frजोर हमला बोला है। इसे ऐतिहासिक तथ्यों के साथ खिलवाड़ बताया जा रहा है।
जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सावरकर ब्रिटिश राज से माफी पत्र लिखने के कारण कुख्यात हैं, न कि स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा के रूप में। नफरत फैलाने और ध्रुवीकरण की राजनीति के जनक को सर्वोच्च सम्मान देना दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
एसपी सांसद राजीव राय ने सवाल उठाया कि क्या माफी मांगना अब सम्मान का आधार बन गया? उन्होंने चेतावनी दी कि इससे आने वाली पीढ़ियां गलत संदेश ग्रहण करेंगी। लोग ऐसी सोच को ठुकरा देंगे।
ओवैसी के यूपी पर टिप्पणी पर राय का पलटवार- ‘योगी जी, मुझे भेज रहे हैं, मेरा ख्याल रखना’। एआईएमआईएम यूपी प्रमुख के बयान पर कहा, पहले विधानसभा पहुंचो, मुख्यमंत्री की कल्पना बाद में।
यह विवाद सावरकर की जटिल छवि को उजागर करता है। समर्थक उन्हें विचारक मानते हैं, विरोधी समझौतावादी। भारत रत्न जैसे सम्मान पर सियासत तेज होने से संसद में गरमागर्म बहस की संभावना है।