मुंबई की चमक-दमक हर किसी को लुभाती है, लेकिन मोहम्मद इकबाल खान ने असफलताओं को सीढ़ी बनाया। 10 फरवरी को 44 साल के हो रहे इस कश्मीरी एक्टर ने टीवी पर रोमांटिक इमेज बनाई, जबकि फिल्में फिसलीं।
कश्मीर के स्कूलों में नाटकों से एक्टिंग का जुनून जगा। मुंबई आने पर संघर्ष शुरू—मॉडलिंग की, परिवार पर बोझ न बनाया। मुश्किलें छिपाईं, खुद लड़े।
फिल्म ‘कुछ तो है’ से शुरुआत अच्छी लगी, मगर ‘बुलेट एक धमाका’, ‘एक छोटी सी लव स्टोरी’, ‘फंटूश’ और ‘जलसा’ फ्लॉप। हताशा हुई, लेकिन टीवी ने नई उमंग दी।
2005 का ‘कैसा ये प्यार है’ सुपरहिट रहा। फिर ‘काव्यांजलि’, ‘कहीं तो होगा’, ‘वारिस’, ‘दिल से दिल तक’, ‘एक था राजा एक थी रानी’ जैसे शोज में हिट। ‘खतरों के खिलाड़ी’ में साहस दिखाया। कुल 19 सीरियल्स का जलवा।
महामारी में दूरी बनाई, मगर ‘न उम्र की सीमा हो’ से वापसी। ओटीटी प्रोजेक्ट्स भी कर रहे। इकबाल सिखाते हैं—अपनी राह खुद बनाओ, सफलता मिलेगी।