अनियमित जीवनशैली और स्मार्टफोन की लत ने नींद को दूर भगा दिया है। कठिन परिश्रम के बाद भी आंखें नींद मांगने से इनकार कर देती हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विशेषज्ञ बता रहे हैं कि सोने से एक घंटा पूर्व सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद करना चाहिए।
स्क्रीन की ब्लू लाइट दिमाग को जागा रखती है और नींद लाने वाले मेलाटोनिन को दबा देती है। इससे नींद टूट-फूटकर आती है, रात कटती रहती है और दिनभर सुस्ती घेरे रहती है। तनाव, चिड़चिड़ाहट बढ़ जाती है।
दीर्घकालिक नुकसान गंभीर हैं- रोग प्रतिरोधक क्षमता घटना, ध्यान भंग होना, वजन बढ़ना और दिल की समस्याएं। शाम की स्क्रीन-मुक्त दिनचर्या नींद सुधारने का प्रभावी तरीका है।
रात को पढ़ाई, संगीत, प्राणायाम, परिजनों से बातचीत या योग करें। ये तनाव दूर भगाते हैं, मन शांत करते हैं। नियमित सोने का समय, काला-ठंडा कमरा, रात के हल्के भोजन से नींद गहरी आएगी।
युवा व बच्चे ज्यादा प्रभावित हैं, उन्हें 7-8 घंटे की नींद अत्यावश्यक है। रातभर फोन न चलाएं, सुबह तरोताजा उठें। यह छोटा परिवर्तन जीवन बदल देगा।