बीआईएस के आईटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ, जब सीबीआई ने साइंटिस्ट-सी अभिजीत सिंह को रिश्वत के जाल में फंसाया। एफएमडीसी में तैनात सिंह पर 70,000 रुपये लेकर फाइल क्लियर करने का आरोप है।
एक शिकायतकर्ता ने बताया कि बिना रिश्वत के उनकी प्रमाणीकरण फाइल अटकी हुई थी। सीबीआई ने 6 फरवरी को केस दर्ज कर छापेमारी की योजना बनाई और सफलतापूर्वक आरोपी को पकड़ लिया।
आरोपी के आवास व दफ्तर पर छापे मारे गए, जहां महत्वपूर्ण कागजात बरामद हुए। जांच एजेंसी अब अन्य संभावित मामलों की पड़ताल कर रही है।
यह घटना सरकारी संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती है। बीआईएस द्वारा जारी प्रमाण पत्र उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े होते हैं, इसलिए सख्ती जरूरी है।
पुणे के एमईएस मामले की तरह यहां भी रिश्वत की मांग सामने आई। सीबीआई की मुहिम से भविष्य में सुधार की उम्मीद है। पूर्ण जांच से सच्चाई सामने आएगी।