विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बांग्लादेश में निपाह वायरस से एक महिला की असामयिक मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। उम्र 40 से 50 वर्ष के बीच की इस मरीज को 21 जनवरी से लक्षण शुरू हुए—बुखार, सिरचकराहट के बाद लार अधिक टपकना, मानसिक असमंजस और दौरा पड़ना शामिल। सात दिनों में जान गंवा दी, पोस्टमॉर्टम जांच ने वायरस साफतौर पर पकड़ा।
यात्रा का कोई रिकॉर्ड न होने पर भी कच्चे ताड़ी यानी खजूर के रस पर शक गया, जो चमगादड़ों के माध्यम से विषाणु ग्रस्त होता है। 35 निकट संपर्कों की नजरबंदी जारी, टेस्ट सब नकारात्मक, अतिरिक्त केस शून्य।
भारत में 14 दिन पहले ही 24 परगना के चिकित्साकर्मी दंपति प्रभावित हुए थे। एयरपोर्ट्स पर मलेशिया से इंडोनेशिया तक स्कैनिंग तेज।
75 फीसदी घातकता वाला यह वायरस चमगादड़ों के फलों से आता है, इंसानों में सीमित प्रसार। डब्ल्यूएचओ ने खतरे को मामूली बताया, पाबंदियां गैरजरूरी। वर्ष 2025 में बांग्लादेश के चार प्रमाणित हादसे।
बिना दवा-टीके के सावधानी जरूरी—साबुन से हाथ सफाई, चमगादड़ भैंस क्षेत्रें से परहेज, दूषित वस्तुओं का त्याग। सतत जागरूकता ही ढाल बनेगी।