देश की सबसे बड़ी शेयर बाजार कंपनी एनएसई ने वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 37 प्रतिशत मुनाफा घसटकर 2,408 करोड़ रुपये किया, जो पिछले साल 3,834 करोड़ था। तिमाही के आंकड़ों से साफ है कि चुनौतियां बरकरार हैं, मगर रिकवरी के संकेत भी दिख रहे हैं।
पिछली तिमाही से मुनाफा 15 प्रतिशत उछला है। आय 9 प्रतिशत सालाना घटी, लेकिन 6 प्रतिशत तिमाही वृद्धि दर्ज हुई। ईबीआईटीडीए 16 प्रतिशत नीचे 2,851 करोड़ पर रहा।
फिर भी, एनएसई का प्लेटफॉर्म धमत रहा। 5.4 लाख करोड़ की फंडरेजिंग हुई। आईपीओ में 65 कंपनियों ने 96,457 करोड़ जुटाए – रिकॉर्ड स्तर। नगर निगम बॉन्ड्स में भी 750 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा।
सेबी की मंजूरी के बाद कंपनी आईपीओ मोड में है। सीईओ चौहान ने डीआरएचपी पर 3-4 महीने का समय बताया। 10 साल की प्रतीक्षा खत्म होने पर सेबी को धन्यवाद।
ओएफएस पर भी काम तेज। एनएसई की बाजार हिस्सेदारी और टेक्नोलॉजी इसे मजबूत बनाती है। निवेशक आईपीओ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, भले ही नतीजे निराशाजनक हों। भविष्य उज्ज्वल दिखता है।