रचनात्मक जगत में हड़कंप मचाने वाली प्रस्तावित ‘हाइब्रिड कॉपीराइट लाइसेंस’ के खिलाफ इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) ने सरकार को पत्र भेजा है। यह फ्रेमवर्क एआई कंपनियों को फिल्में, गाने और क्रिएटिव कंटेंट बिना इजाजत ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करने की छूट देगा, जिसका एसोसिएशन ने पुरजोर विरोध किया है।
पत्र में कहा गया कि राइट धारकों के मौलिक अधिकारों पर यह कुठाराघात होगा। हितधारकों से चर्चा के बाद आईएमपीपीए ने इसे नामंजूर करार दिया।
भारतीय क्रिएटिव इंडस्ट्री आर्थिक रूप से खतरे में है। वैश्विक पटल पर क्रिएटिव वर्क्स को मुफ्त डेटा नहीं माना जा रहा। यह रचनाकारों की मेहनत का फल है। बिना सहमति एआई उपयोग पर मुकदमे हो रहे हैं, जहां सहमति और मुआवजा अनिवार्य हो रहा है।
भारत में पाइरेसी से पहले ही उद्योग को करोड़ों का चूना लग रहा है। कानूनी प्रक्रिया धीमी होने से उल्लंघन आम है। एआई के इस ढांचे से स्थिति और बिगड़ेगी।
वैश्विक रुझान रचनाकारों को मजबूत सुरक्षा दे रहा है। आईएमपीपीए का मानना है कि सख्त कानून ही कंपनियों को लाइसेंसिंग की ओर धकेलेंगे।
रचनाकार अधिकारों की रक्षा करते हुए स्वैच्छिक समझौतों को प्रोत्साहित करने की मांग उठाई गई है। यह संतुलित तरीके से तकनीकी प्रगति सुनिश्चित करेगा।