मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का अद्भुत धाम है, जहां समय की धारा भी रुक सी जाती है। शिप्रा तट पर विराजमान यह मंदिर जीवन परिवर्तन का प्रतीक है, लेकिन परिसर के भीतर मुख्य शिवलिंग से पुराना वृद्धकालेश्वर महादेव का मंदिर है, जिसका दर्शन महाकाल भक्ति को परिपूर्ण बनाता है।
मुख्य गर्भगृह पहुंचने से ठीक पहले यह प्राचीन शिवालय है, जहां बाबा महाकाल जैसा ही शिवलिंग प्रतिदिन सजाया जाता है। कथाओं के अनुसार, वृद्धकालेश्वर शिव के वृद्ध रूप हैं और महाकाल से भी पूर्व प्रकट हुए। आक्रमणों में क्षतिग्रस्त होने पर भी यह अडिग खड़ा है।
मंदिर की पुरानी संरचना ऐतिहासिक आघातों की गवाही देती है, मगर रखरखाव से यह जीवंत बना रहता है। यहां स्पर्श दर्शन सुलभ है, जबकि महाकाल पर प्रतिबंध रहता है। सावन मास व शिवरात्रि पर विशेष अनुष्ठान लाखों भक्तों को खींचते हैं।
आरती व पूजा का क्रम मुख्य मंदिर से मेल खाता है। भक्त परंपरा के अनुसार पहले महाकाल, फिर वृद्ध स्वरूप के दर्शन पूर्ण पुण्य प्रदान करते हैं।
यह स्थल आस्था का प्रतीक है, जो भक्तों को संदेश देता है कि प्राचीन रहस्यों की खोज ही सच्ची मुक्ति का मार्ग है। उज्जैन की यह धरोहर सदैव अमर रहेगी।