नई दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र की आर्थिक रणनीतियों पर सवाल खड़े किए। पीएम के तीसरे टर्म में समावेशी प्रगति सुनिश्चित करने की मांग की।
तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दम भले भरा जाए, लेकिन आम आदमी को फायदा न के बराबर। प्रति व्यक्ति आय स्थिर, बेरोजगारी बढ़ रही और किसान परेशान।
अमेरिका से कृषि आयात पर जीरो टैरिफ लेकिन हमारे उत्पादों पर भारी शुल्क से किसान हताश। बांग्लादेश के साथ तनाव और इतिहास की तोड़फोड़ पर कड़ा ऐतराज।
प्रधानमंत्री से पारदर्शिता की उम्मीद, न कि गलत प्रचार की। संसद में महिलाओं को दोषी ठहराना दुर्भाग्यपूर्ण। स्पीकर का बयान निंदनीय जहां महिला विरोध को पीएम खतरे से जोड़ा गया।
लोकतंत्र में प्रदर्शन मौलिक अधिकार। 33 फीसदी महिला सांसदों के आने पर ऐसी राजनीति कैसे चलेगी? मणिपुर की अस्थिरता राजनीतिक सौदेबाजी का नतीजा।
केंद्र को बेरोजगारी, किसान कल्याण, व्यापार न्याय और महिला सम्मान पर फोकस करना चाहिए। बड़े-बड़े वादों से ऊपर उठकर जमीन पर बदलाव लाएं, यही सच्ची जवाबदेही है।