प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुग्राम में रिचा इंडस्ट्रीज के बहुप्रचारित घोटाले की जांच तेज करते हुए पूर्व रेजोल्यूशन प्रोफेशनल अरविंद कुमार को धर दबोचा। 2018 से 2025 तक आरपी रहे कुमार की 3 फरवरी 2026 को हुई गिरफ्तारी पैसे की सफेदी और बैंक फ्रॉड से जुड़ी है। अदालत ने उन्हें 8 दिनों के लिए एजेंसी के हवाले कर दिया।
यह कार्रवाई संदीप गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद आई है। सीबीआई की शिकायत पर शुरू हुई जांच में 236 करोड़ के बैंक नुकसान का खुलासा हुआ, जो आपराधिक साजिश से जुड़ा था। कुमार पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी के पैसे को परतदार ट्रांजेक्शन्स से अपने गुटवालों तक पहुंचाया और खुद के खातों में जमा करवाया।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनके अकाउंट में 80 लाख कैश और 1 करोड़ ट्रांसफर संदिग्ध हैं—ये वही फंड्स जो कंपनी से निकले थे। ईडी का मानना है कि कुमार फ्रॉड की कमाई के सीधे फायदे में थे और इसे दिवालिया प्रोसेस का हिस्सा दिखाया। बैंकों को 708 करोड़ के बदले सिर्फ 40 करोड़ मिले, यानी 94% का घाटा।
आईबीबीआई ने पहले कुमार को 2 साल के लिए अयोग्य घोषित किया था। एजेंसी ने कहा कि ऐसी चालाकियां वित्तीय सिस्टम को कमजोर करती हैं। जांच जारी है, सभी लिंक्स उजागर होंगे।