‘गोदान’ फिल्म 6 फरवरी को रिलीज हो चुकी है, लेकिन कांग्रेस और कुछ मुस्लिम नेताओं का विरोध तेज हो गया है। वे फिल्म को भेदभाव फैलाने वाला बताकर बैन की मांग पर अड़े हैं। इस पर विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कांग्रेस को आईना दिखाया और उसके पुराने पापों के लिए माफी मांगने को कहा।
बंसल ने 1966 के वोट क्लब कांड को याद दिलाया। ‘इंदिरा गांधी के समय संसद के पास गो भक्तों की विशाल सभा पर गोलियां बरसाई गईं। भक्तों से लेकर गो माता तक निशाने पर रहीं। कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं, लेकिन देश शर्म से डूब गया था,’ उन्होंने कहा। कई संतों को गायब कर हत्या का भी आरोप लगाया।
उन्होंने निहत्थे राम भक्तों पर हमलों का जिक्र कर कांग्रेस की साख पर सवाल उठाए। ‘फिल्म पर बैन की बात छोड़ो, पहले अपने अतीत से सफाई दो। संसद गोहत्या रोकने का कानून बनाए और गौमाता का मान बहाल करे।’
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अंशू अवस्थी और पूनम पंडित ने विरोध जताया है। निर्देशक अमित प्रजापति की इस फिल्म के पीछे विनोद कुमार चौधरी, पारूल चौधरी और चेतन गोस्वामी हैं। यह झड़प अब गौसुरक्षा, सेंसरशिप और ऐतिहासिक जवाबदेही के सवाल खड़े कर रही है, जिसका असर सियासत पर दिखेगा।