पेट की मामूली तकलीफें आंतों में छिपी गंभीर बीमारियों की ओर इशारा कर सकती हैं। जंक फूड और एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग से आंतों का संतुलन बिगड़ रहा है।
आयुर्वेद अतिसार, ग्रहणी और कृमि जैसे रोगों का वर्णन करता है, जो माइक्रोबियल असंतुलन से जन्म लेते हैं।
प्राकृतिक उपचारों से इस समस्या का समाधान संभव है। दोपहर की छाछ में जीरा-काला नमक मिलाकर पिएं।
त्रिफला चूर्ण रात में गर्म पानी से लें, यह डिटॉक्स का सर्वोत्तम माध्यम है।
सूजन के लिए हल्दी वाला दूध लाभकारी। अजवाइन व सौंठ अपच व गैस से मुक्ति दिलाते हैं।
अनार रस या छिलका एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से आंतों को स्वस्थ बनाता है। बेल रस पाचन को मजबूत करता है।
ये आसान नुस्खे अपनाकर आप लंबे समय तक स्वस्थ आंतें बनाए रख सकते हैं।