भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी शुक्रवार को ब्याज दरों पर फैसला सुना रही है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि दिसंबर कट के बाद फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा, मगर भविष्य की नीति संकेत बाजार को दिशा देंगे।
बुधवार से चली बैठक में मजबूत जीडीपी वृद्धि और यूएस-ईयू व्यापार समझौतों का असर दिख रहा है। इनसे शुल्क घटकर 18% रह गया, भारत को एशिया का कम टैरिफ बाजार बना दिया। डीबीएस की राधिका राव कहती हैं, वैश्विक जोखिम घटने से नीति में लचीलापन आ सकता है।
रुपये की कमजोरी, डिपॉजिट चुनौतियां और आउटफ्लो जोखिम दर कट से रोकेंगे। इसके बजाय आरबीआई बॉन्ड खरीद, तरलता और करेंसी उपायों पर भरोसा करेगा। वर्तमान तिमाही से लेकर 2026 के पहले क्वार्टर तक यह जारी रह सकता है।
एसबीआई रिसर्च बताती है कि बॉन्ड यील्ड बढ़ने से यथास्थिति बरकरार रहेगी। ओएमओ की सफलता सही सिक्योरिटीज चुनने पर निर्भर। ये व्यापार सौदे निर्यात को गति देंगे, वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाएंगे।
आरबीआई के बयान से विकास, महंगाई और स्थिरता का संतुलन स्पष्ट होगा। निवेशक नीतिगत रुख का बारीकी से विश्लेषण करेंगे।