‘बॉर्डर-2’ ने 250 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, दर्शकों को रोमांचित कर रही है। सहायक भूमिकाओं ने फिल्म को मजबूती दी, खासकर वंश भारद्वाज का सूबेदार संतराम अविस्मरणीय है।
वंश ने साझा किया, ‘ऑफर पर यकीन नहीं हुआ। बॉर्डर में होना सपना था। शूटिंग का छोटा प्लान उत्साहित कर गया।’ मूल ‘बॉर्डर’ की विरासत पर बोले, ‘उसने कईयों को सेना की ओर मोड़ा। हम उसी जिम्मेदारी से सैनिकों को दिखा रहे हैं।’
उनका किरदार गीता पाठ से शांतिप्रिय है। ‘मां का दिया ग्रंथ जीवन का सबक देता है। मैं भी शांत हूं, हालांकि कभी-कभी जोश आ जाता है।’ फिटनेस तो बचपन से है, लेकिन सैनिक मनोबल पकड़ना सबसे कठिन। ‘प्राणों की बाजी लगाकर भी गर्व से लड़ना—यह भाव लाना चुनौतीपूर्ण था।’
थिएटर बैकग्राउंड से फिल्म आसान लगी। ‘शारीरिक से मानसिक तैयारी, सब एक।’ फिल्म राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनी हुई है।