जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने नशामुक्ति अभियान को गति देने वाली बड़ी खबर दी। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्यों के दुरुपयोग रोकने वाला विधेयक इस सत्र में सदन के पटल पर रखा जाएगा।
सदन को संबोधित करते हुए इटू ने खुलासा किया कि नशा छुड़ाने के नियम तैयार हैं और विधि विभाग की समीक्षा के लिए भेजे जा चुके हैं। आंकड़े हैरान करने वाले हैं- 2022 से अब तक 49,276 मामले दर्ज, जिसमें कश्मीर के 16,759 और जम्मू के 32,517 केस हैं।
उन्होंने तनवीर सादिक के पूर्व विधेयक का उल्लेख किया, जिसमें स्कूलों में नशे के खतरों पर शिक्षा अनिवार्य थी। सरकारी वचन पर वह विधेयक लौटा लिया गया था, अब वादा पूरा करने का समय है।
संसद में पेश आंकड़ों से साफ है कि जम्मू-कश्मीर में नशे के शिकार लगभग 10 लाख हैं, जो 8 प्रतिशत आबादी है। एक समिति ने 13.5 लाख का आंकड़ा बताया, मुख्यतः 18 से 75 साल के लोग।
यह विधेयक न केवल दुरुपयोग रोकेगा बल्कि जागरूकता और उपचार को प्रोत्साहित करेगा। नशे की बाढ़ से जूझते क्षेत्र के लिए यह नया संकल्प है, जो भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।