बेंगलुरु। मनी लॉन्ड्रिंग विवाद में फंसे कांग्रेस विधायक सतीश सैल को कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को मेडिकल बेल दे दी। जेल से रिहा होकर वे लिवर ट्रांसप्लांट करा सकेंगे, जो उनकी जान के लिए जरूरी है।
अदालत ने कड़े निर्देश जारी किए। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया पर हर 15 दिन में रिपोर्ट, और दो माह में स्वास्थ्य अपडेट कोर्ट में। गवाहों को प्रभावित करने या ट्रायल रोकने की मनाही है।
5 लाख का बॉन्ड और पर्सनल सिक्योरिटी अनिवार्य। न्यायालय ने स्वास्थ्य राहत और जांच की अखंडता दोनों को सुनिश्चित किया।
9 सितंबर 2025 को ईडी ने बेंगलुरु दफ्तर में पूछताछ के बीच सैल को हिरासत में लिया। अवैध लौह अयस्क से कमाई को सफेद करने का इल्जाम।
13-14 अगस्त 2025 के छापों में कारवार से दिल्ली तक नकदी, सोना-चांदी बरामद। सामान दो बड़े ट्रंक में भरा गया।
सैल तीसरे कांग्रेस विधायक हैं ईडी के जाल में—केसी वीरेंद्र व विनय कुलकर्णी के बाद।
2010 के बेलकेरी स्कैम में 26 अक्टूबर 2024 को सात साल कैद व 44 करोड़罚। सीबीआई चार्जशीट में सहआरोपी।
21 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट स्टे, कारवार उपचुनाव स्थगित, सदन से बहिष्कार—फिर नया ईडी केस।
यह फैसला वीआईपी मामलों में न्यायिक विवेक का प्रतीक है।