इस्लामाबाद में एफआईए ने बच्चों के यौन शोषण के एक विशाल नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया, जो ब्लैकमेल से काम करता था। गिरफ्तार आरोपी के पास सैकड़ों वीडियो बरामद हुए, जो डिजिटल और भौतिक दोनों जगतों में व्याप्त खतरे को उजागर करते हैं।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने चिंता जताई कि सरकार बच्चों को सुरक्षित करने के लिए क्या कर रही? माता-पिता सतर्कता के लिए किसे दोष दें? अन्य गिरोहों पर नजर रखने की रणनीति कहां? जवाबों की कमी चिंताजनक है।
वास्तविक दुनिया में शोषण साबित करना कठिन, तो साइबर अपराधी तो और चालाक। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोशल मीडिया उम्र सीमा या पाठ्यक्रम सुधार हुए, पाकिस्तान में व्यक्तिगत स्तर पर निर्भरता।
साहिल रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पहले छह महीनों में 20% ज्यादा 1956 केस: 605 अपहरण, 192 लापता, 950 शोषण, 34 बाल विवाह। बदनामी, डर और कमजोर तंत्र चुप्पी थोपते हैं। जागरूकता से रिपोर्टिंग बेहतर हुई, मगर आर्थिक दबावों ने खतरा बढ़ाया।
बच्चों की रक्षा के लिए व्यापक, लंबे समय की नीति जरूरी है, जो हर स्तर पर काम करे।