लोकसभा में गुरुवार को तनाव चरम पर पहुंच गया। कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बोलने के अधिकार की पैरवी की। राष्ट्रपति अभिभाषण के दौरान उनकी टिप्पणियों पर आपत्ति ने संसदीय कार्यवाही को ठप कर दिया और एक प्रमुख मुद्दा बना दिया।
थरूर ने हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘विपक्षी नेता को अभिव्यक्ति का हक मिले। वे जिस बात का जिक्र कर रहे थे, वह किसी मैगजीन में प्रकाशित हो चुकी थी। कोई नई या अनदेखी जानकारी नहीं। वे संक्षेप में बोलकर अभिभाषण के अन्य पहलुओं पर आना चाहते थे। लेकिन इतनी भारी आपत्ति और रोकटोक से समस्या बढ़ गई।’
संसद में विपक्ष का विरोध जारी है। उनका कहना है कि सत्ताधारी दल सदन में उनकी आवाज को कुचल रहा है। थरूर का बयान इस लड़ाई को नई ताकत दे रहा है।
विचारों के अलावा थरूर ने अपनी हालिया दुर्घटना का जिक्र किया। बुधवार को संसद परिसर से बाहर गिरने पर उन्हें हेयरलाइन फ्रैक्चर हुआ। ‘संसद से बाहर आते हुए कल गिर पड़ा। हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया, अफसोस की बात,’ उन्होंने बताया।
फिर भी, थरूर ने संसदीय कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ा। वे प्रतिदिन सदन में उपस्थित रहेंगे और अगले हफ्ते कमेटी मीटिंग्स अटेंड करेंगे, जरूरत पड़े तो व्हीलचेयर पर। इससे पहले पार्टी बैठक मिस करने पर उन्होंने माफी मांगी थी, क्योंकि एक्स-रे और अस्पताल जाना पड़ा था।
राष्ट्रपति अभिभाषण से जुड़े विवादों के बीच यह घटनाक्रम संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। थरूर की मांग विपक्ष की एकजुटता को दर्शाती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्षरत है।