हिंद-प्रशांत में तनावपूर्ण माहौल के बीच ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने भारत के साथ बढ़ती रणनीतिक निकटता पर प्रकाश डाला। नई दिल्ली में उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्र इस क्षेत्र को स्थिर, स्वतंत्र और समृद्ध बनाना चाहते हैं, जिसमें पीएम मोदी और अल्बनीज का पूर्ण समर्थन है।
रणनीतिक तालमेल, आर्थिक सहयोग और भारतीय प्रवासियों का ‘मानवीय पुल’ इन संबंधों की ताकत हैं। 10 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग ऑस्ट्रेलिया में न केवल समुदाय को मजबूत कर रहे, बल्कि व्यापार को भी गति दे रहे हैं।
ग्रीन के अनुसार, भरोसेमंद साझेदारी ही ईसीटीए जैसे समझौतों का आधार बनी, जिसके फलस्वरूप व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
पिछले पांच सालों के आंकड़े गवाही देते हैं: भारत का कुल निर्यात 40% बढ़ा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जाने वाला 200%! यह पूरक अर्थव्यवस्थाओं की मिसाल है।
शिक्षा, कृषि, खानपान और पर्यटन में अपार संभावनाएं हैं। तकनीक क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की नवाचार क्षमता (वाई-फाई, गूगल मैप्स) को भारत का वैश्विक स्केल लाभ दे सकता है। एआई समिट से ठीक पहले ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश का संदेश दिया।
यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय लाभ देगी, बल्कि हिंद-प्रशांत की भविष्य की रूपरेखा भी तैयार करेगी।