बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान पर महिलाओं के खिलाफ दिए बयानों का भारी दबाव बना हुआ था। सोशल मीडिया पर कामकाजी महिलाओं को कोसने वाले रहमान ने अब नया सुर अपनाया है। उन्होंने वादा किया है कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
स्थानीय मीडिया ने बताया कि शनिवार को उनके पोस्ट ने तूफान ला दिया, जिसमें महिलाओं की पब्लिक लाइफ में भूमिका को नैतिक ह्रास का सबब कहा गया। सभी पक्षों से नाराजगी भरी प्रतिक्रियाएं आईं।
कुरिग्राम में चुनावी रैली के दौरान रहमान ने महिला समर्थकों से सीधा संवाद किया। द डेली स्टार ने उनके हवाले से लिखा, ‘घर, सड़क, दफ्तर- हर जगह आपकी पूर्ण सुरक्षा का वादा। मांएं सुरक्षित न हों तो वह मेरा बांग्लादेश नहीं। बहनें-बेटियां निर्भय होकर आगे बढ़ेंगी।’
उन्होंने बीएनपी को जिम्मेदार ठहराया, दावा किया कि उनके सोशल अकाउंट हैक हो गए। बीएनपी नेता तारिक रहमान ने रैली में कहा (बोनिक बार्ता), ‘महिलाओं के लिए अपशब्द इस्तेमाल करने वाले, उन्हें नौकरी से भगाने वाले हितैषी नहीं। ऐसे लोग देश के लिए खतरा हैं।’
पार्टी की महिला इकाई की नेता नूरुन्निसा सिद्दिका ने पहले स्पष्ट किया था कि इस्लाम में पुरुष महिलाओं के रक्षक होते हैं, इसलिए शीर्ष नेतृत्व में महिलाओं की जरूरत नहीं। अधिकारों का पालन ही मुख्य है।
यह घटनाक्रम बांग्लादेश के आगामी चुनावों में लिंग मुद्दों को केंद्र में लाता है। रहमान का यह नया स्टैंड महिला मतदाताओं को लुभाने की रणनीति लगता है, लेकिन इसकी सच्चाई पर सवाल बाकी हैं। राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव संभव।