मुंबई के सिनेमा जगत में अमिताभ बच्चन का नाम अनुशासन का पर्याय है। ‘रンバ हो’ गर्ल कल्पना अय्यर ने ‘सत्ते पर सत्ता’ के दिनों का वह किस्सा सुनाया, जब बिग बी की समयबद्धता ने उन्हें जीवन का बड़ा सबक दिया।
फिल्म की शूटिंग बल्लार्ड पियर पर होती थी, जहां सुबह 6 बजे पहुंचना जरूरी था। जूहू निवासी अमिताभ अपनी सफेद एंबेसडर से सबसे पहले हाजिर हो जाते। कल्पना अंधेरी से आतीं तो पातीं कि सेट पर केवल अमिताभ जी तैयार खड़े हैं।
उन्होंने अपनी मां की सीख का जिक्र किया, ‘समय का सम्मान ही सर्वोत्तम गुण है। अमिताभ जी ने इसे चरितार्थ किया।’ कोई लेटलतीफी नहीं, बस पूर्ण निष्ठा।
यह घटना प्रोफेशनलिज्म की नई परिभाषा बनी। राज एन. सिप्पी की इस कालजयी फिल्म ने दर्शकों को खूब भाया, लेकिन सेट के पीछे का अनुशासन कम ही ज्ञात था। कल्पना का अनुभव सिद्ध करता है कि सितारे का असली जलवा समय में छिपा है।