भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने एक बार फिर अपनी वाक्पटुता से विपक्ष को घेरा। जेपी नड्डा के लोकसभा में ‘अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाओ’ बयान पर त्रिवेदी ने एक्स पर लंबा विश्लेषण पोस्ट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘अबोध’ का अर्थ है पूर्ण ज्ञानहीनता। ज्ञान अविरल है, अज्ञान किसी आयु तक सीमित नहीं – यह बात विपक्षी नेता के व्यवहार से प्रमाणित है।
त्रिवेदी ने संसदीय मर्यादाओं पर पाठ पढ़ाया। फ्लोर पर मीडिया क्लिप्स प्रमाण नहीं बन सकतीं। आधिकारिक रिकॉर्ड ही तथ्य हैं। रक्षा क्षेत्र के संवेदनशील पत्राचार ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के अधीन गोपनीय रहते हैं – जनमंच पर नहीं लाए जा सकते।
इतिहास के पन्ने खोलते हुए उन्होंने नेहरू के 1962 के पत्र का जिक्र किया, जिसमें अमेरिका से हवाई हमले की गुहार लगाई गई। डीक्लासिफाइड दस्तावेज बताते हैं कि भारत ने बॉम्बर, पायलट और अमेरिकी स्टाफ मांगा। राजदूत बीके नेहरू ने किताब में अपनी शर्म का इजहार किया – पत्र देते हुए रो पड़े।
‘परिवार के सदस्य से ही शर्मनाक हार की कहानी,’ त्रिवेदी ने व्यंग्य किया। राज्यसभा में नड्डा के संबोधन पर खड़गे ने आपत्ति जताई। त्रिवेदी का बयान भाजपा की आक्रामक रणनीति को मजबूत कर रहा है, जो कांग्रेस के ऐतिहासिक फैसलों पर सवाल उठा रहा है। राजनीतिक बहस अब गहराती जा रही है।