बांग्लादेश में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है, जिसमें औद्योगिक प्रदूषण मुख्य खलनायक बनकर उभरा है। मीडिया रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि ढाका की विषैली वायु सांस संबंधी रोगों को हवा दे रही है।
दुनिया के सीओ2 में न्यूनतम हिस्सा होने पर भी ढाका का वायु सूचकांक खतरनाक स्तर पर है। अस्थमा से कैंसर तक, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और पुरानी फेफड़े रोग बढ़ रहे हैं।
समतल भूभाग प्रदूषण को जकड़ लेता है, जलवायु परिवर्तन असर तेज करता है। 174 मिलियन जनसंख्या वाले देश का ढाका 2050 में जनघनत्व का केंद्र बनेगा।
छाती रोग अस्पताल के डॉ. मुस्तफिजुर रहमान चेताते हैं—प्रदूषण से स्वास्थ्य तंत्र ‘बर्बाद’ हो सकता है। स्लम क्षेत्रों में फैक्ट्रियां, घटिया नाले संक्रमण फैला रहे।
भट्ठों का काला धुआं, टेक्सटाइल-चमड़ा कारखानों के रसायन नदियों को दूषित कर रहे। चिकित्सा बिलों से कर्ज, फिर भूमध्य यात्रा का जोखिम।
डॉ. सफिउन इस्लाम के अनुसार, मरीज दोगुने हो गए, आईसीयू में भिड़बाड़। राजनीति बाधा डाल रही। प्रदूषण स्रोतों पर रोक आपात जरूरत।
उद्योगों का पुनर्वास, सफाई शिक्षा और चुनावी वादों पर जोर। 12 फरवरी को हसीना-पूर्व दौर का पहला मतदान सही नेतृत्व ला सकता है, जो प्रदूषण से जंग जीते।