तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डीएमके और डीएमडीके के बीच सीट शेयरिंग और मजबूत साझेदारी को लेकर बातें चल रही हैं, जो चुनावी समीकरण बदल सकती हैं।
सत्तारूढ़ डीएमके ने डीएमडीके को सात विधानसभा क्षेत्रों के साथ एक राज्यसभा टिकट का प्रस्ताव दिया है। अप्रैल में खाली हो रही इस सीट पर दावा मजबूत करने की यह रणनीति गठबंधन विस्तार का संकेत देती है।
डीएमडीके अधिक सीटें चाहती है और 14 विधानसभा स्थानों की मांग कर रही है। साथ ही एनडीए से भी संपर्क बनाए रखा है, जिससे चर्चा में रोमांच बना हुआ है। डीएमके को भरोसा है कि समझौता निकल आएगा।
गठबंधन पक्का करने की जल्दी में डीएमके चुनावी रजिस्टरों का गहन पुनरीक्षण पूरा कर संगठन को सक्रिय करना चाहती है। पार्टी का लक्ष्य 170 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारना है, जो सत्ता में बने रहने के दमखम को दर्शाता है।
अन्य संभावनाओं में ओ पन्नीरसेल्वम जैसे नेताओं से बात हुई, लेकिन उनकी प्रभावशालीता कमतर पाई गई। डीएमके अब संख्या और प्रभाव वाले साथियों पर केंद्रित है।
प्रतीकात्मक से ऊपर उठकर ठोस गठजोड़ रचने की कोशिश में डीएमके सफल होगी या नहीं, यह तय करेगा तमिलनाडु की सियासी दिशा। डीएमडीके का फैसला निर्णायक साबित होगा।