राज्यसभा में गुरुवार को विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। लोकसभा में विपक्षी नेता को चुप कराए जाने के मुद्दे पर सदन गरमा गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह न सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान है, बल्कि पूरे लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों सदन मिलकर संसद बनाते हैं और उनकी गरिमा बराबर है।
किरेन रिजिजू ने जवाब में विपक्ष को राजनीतिक नौटंकी का दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि यह पीएम के भाषण को रोकने की चाल है। रिजिजू ने नियमों का जिक्र कर कहा कि लोकसभा रुकने से राज्यसभा नहीं रुक सकती। विपक्ष को लोकसभा में पर्याप्त समय मिला था, फिर यह हंगामा क्यों?
निर्मला सीतारमण ने संसदीय शिष्टाचार पर बल देते हुए ‘लिंचिंग’ शब्द की निंदा की। उन्होंने कांग्रेस राज में राजस्थान की घटना याद दिलाई और कहा कि ऐसी भाषा स्वीकार्य नहीं।
शोरशराबे के बीच विपक्ष सदन से बाहर निकल गया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात बताया, जबकि सरकार ने परंपराओं का पालन करने पर जोर दिया। इस घटना ने संसदीय सत्र को लंबे हंगामे की ओर धकेल दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खाई और गहरी होती जा रही है।