सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाते हुए प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनावों को घेर लिया है। याचिका में महिलाओं को 10 हजार रुपये डायरेक्ट ट्रांसफर करने वाली योजना को वोट खरीदने का हथियार बताया गया है।
चुनाव आचार संहिता के दौरान हुई इस कार्रवाई को पार्टी ने लोकतंत्र विरोधी करार दिया। मांग है कि भ्रष्टाचारपूर्ण चुनावों को अमान्य घोषित कर दोबारा स्वतंत्र मतदान कराया जाए।
कल मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार इस याचिका पर विचार करेंगे। यह सुनवाई बिहार की राजनीतिक जमीन हिला सकती है।
जन सुराज का तर्क है कि ऐसी फंडिंग से मतदाता प्रभावित हुए और परिणाम पक्षपाती बने। प्रशांत किशोर ने इसे सियासी भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग घोषित किया।
दूसरी ओर सत्ताधारी दल इसे हार के बाद का रोना बता रहे हैं। फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला चुनावी प्रक्रियाओं पर नया मानदंड गढ़ सकता है। अपडेट्स के लिए बने रहें।