क्रेमलिन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ट्रंप ने कहा था कि नए व्यापार समझौते में भारत ने रूसी तेल आयात रोकने पर सहमति जताई है। प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसे पुरानी बात बताते हुए कहा कि भारत ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने को स्वतंत्र है।
ट्रंप के अनुसार, भारतीय निर्यात पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने के बदले भारत ने रूस से क्रूड बंद करने का वचन दिया। लेकिन पेसकोव ने स्पष्ट किया कि भारत कई देशों से तेल लेता है और रूस को कोई बंदी की सूचना नहीं मिली। ‘यह कुछ भी नया नहीं है,’ उन्होंने जोर दिया।
रूस के विदेश मंत्रालय ने भी भारत संग ऊर्जा साझेदारी की अहमियत बताई। प्रवक्ता मारिया जखारोवा के मुताबिक, रूसी तेल के अनूठे गुण भारतीय रिफाइनरियों के लिए जरूरी हैं, जिन्हें अन्य स्रोत आसानी से नहीं बदल सकते। यह साझा हित अंतरराष्ट्रीय बाजार को संतुलित रखता है।
यूक्रेन युद्ध के बाद 2022 से भारत रूस का प्रमुख तेल ग्राहक रहा। 2025 में रूसी क्रूड भारत के आयात का करीब 33 प्रतिशत था, लेकिन हाल के वैश्विक बदलावों से मात्रा घटी है। फिर भी, संबंध अटूट हैं।
पेसकोव ने कहा कि भारत के निर्णय ऊर्जा सुरक्षा और बाजार गतिशीलता पर आधारित होंगे, न कि विदेशी दबाव पर। रूस-भारत की रणनीतिक मित्रता व्यापार की नींव है। यह घटना दर्शाती है कि ऊर्जा राजनीति में व्यावहारिकता ही निर्णायक होती है।