जनरल नरवणे की किताब पर संसदीय हंगामे के दौर में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी व गांधी परिवार के इतिहास पर 40 किताबों की सूची जारी कर पलटवार किया। एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई यह सूची 1975-77 के आपातकाल, वंशवाद और अन्य काले अध्यायों को निशाना बनाती है। दुबे का दावा है कि ये किताबें कांग्रेस शासन के छिपे राज खोलती हैं।
40 पोस्ट्स में हर किताब का नाम, लेखक व सारांश दिया गया। दुबे ने कहा, ‘अप्रूव्ड किताबों पर बहस हो, न कि अनप्रकाशित दावों पर। ये नेहरू-गांधी काल के सत्य को सामने लाती हैं।’ उन्होंने सदन में इन्हें लाकर अंश पढ़े, जिससे विपक्ष भड़क उठा।
सबका पटाक्षेप राहुल गांधी के बयान से हुआ, जहां उन्होंने चीन सीमा विवाद पर नरवणे पुस्तक का हवाला दिया। सत्ता पक्ष ने संसदीय मर्यादाओं का हवाला देकर विरोध किया। गांधी के किताब लहराने पर दुबे ने जवाबी कार्रवाई की।
दुबे के अनुसार, 40 तो छोटा सा हिस्सा है—150 से अधिक किताबें धोखा, भ्रष्टाचार उजागर करती हैं। यह लड़ाई इतिहास की किताबों पर सिमट गई है।
राजनीतिक तापमान चढ़ा हुआ है। क्या यह सूची बहस को गहराई देगी या सिर्फ शोर बढ़ाएगी? भविष्य के सत्र रोचक रहेंगे।