रूस ने न्यू स्टार्ट संधि के खात्मे के बाद परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के बंधनों से मुक्ति की घोषणा कर दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 5 फरवरी को समाप्त हुई इस संधि के नियम अब रूस या अमेरिका पर बाध्यकारी नहीं हैं। दोनों महाशक्तियां अब अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां बना सकती हैं।
रूस ने संधि सीमाओं को बनाए रखने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अमेरिका की ओर से कोई स्पष्ट सहमति न मिलने पर सभी प्रतिबद्धताएं समाप्त हो गईं। मंत्रालय ने कहा कि संधि के मूल सिद्धांतों सहित सभी घोषणाएं अब अप्रासंगिक हैं।
राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रूस कठोर कदम उठाने को तैयार है, यदि कोई नया जोखिम उत्पन्न हो। फिर भी, राजनीतिक स्तर पर रणनीतिक संतुलन कायम रखने हेतु चर्चा का द्वार खुला है।
2010 की इस संधि ने दोनों पक्षों के रणनीतिक परमाणु हथियारों को सीमित किया था—1550 तैनात वारहेड्स, 800 लॉन्चर। पहले 10 वर्षीय, इसे बाद में 2026 तक विस्तारित किया गया। पुतिन का 2023 का बयान और ट्रंप की टिप्पणी इसकी पृष्ठभूमि रेखांकित करते हैं।
2019 में आईएनएफ संधि के पतन के बाद यह एकमात्र प्रमुख समझौता बचा था। अब बिना किसी ढांचे के, परमाणु विस्तार की आशंका बढ़ गई है। रूस की यह स्थिति मजबूत रक्षा के साथ संवाद की इच्छा को प्रतिबिंबित करती है, जो अंतरराष्ट्रीय तनावों में संजीदा कूटनीति की मांग करती है।