कर्नाटक विधानसभा में हंगामे के बीच बुधवार को केंद्र सरकार के नए ग्रामीण रोजगार कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया। ‘विकसित भारत-रोजगार मिशन’ को चुनौती देते हुए मनरेगा की बहाली की मांग की गई। भाजपा ने इसे विधायी नियमों का उल्लंघन करार दिया और वॉकआउट कर दिया।
मंत्री प्रियांक खरगे ने बहस छेड़ी, आडवाणी और वरुण गांधी के पुराने बयानों का हवाला देकर नए अधिनियम पर सवाल ठोके। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने बिना राज्यों की राय लिए मनरेगा बदल दिया। आर अशोक ने पलटवार किया- योजना पारदर्शी है, 125 दिन का काम, पूर्व चर्चाएं हुईं। कांग्रेस के एजेंटों का भ्रष्टाचार उजागर करते हुए आंकड़े दिए- 2024-25 में 50 करोड़ का घोटाला।
मतदान में कांग्रेस बहुमत से जीती, सदन स्थगित। सिद्धरमैया ने गांधीजी के नाम हटाने पर नाराजगी जताई, केंद्र को चिट्ठी लिखेंगे। केंद्र का तर्क है कि 20 साल पुरानी योजना का आधुनिकीकरण जरूरी, राज्य 40% हिस्सा देने से कतरा रहे।
यह टकराव ग्रामीण विकास की नीतियों पर सियासी जंग को उभारता है। पारदर्शिता और गारंटी के बीच संतुलन कैसे बने, यह भविष्य का सवाल है। कर्नाटक का कदम अन्य राज्यों को प्रभावित कर सकता है।