अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन को लेकर खतरे की घंटी बजाई, जो मुख्यतः चीन पर निर्भर है। इसे जियोपॉलिटिकल संकट बताते हुए 55 देशों के साथ नई विविधीकरण रणनीति की घोषणा की, ताकि अर्थव्यवस्था, इनोवेशन और सुरक्षा सुरक्षित रहे।
क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल में रूबियो ने प्रेस से कहा, ‘शानदार शुरुआत। 55 पार्टनर, कई साइन अप, मकसद स्पष्ट।’ एस जयशंकर ने भारत का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि नीति निर्माता कच्चे माल को नजरअंदाज करते रहे। ‘डिजाइन पर फोकस, लेकिन बेसिक सामग्री भूला दी।’ चेन एक देश में संकेंद्रित, जो हथियार या बाधाओं का शिकार हो सकती है।
दुनिया में संसाधन हैं, पर सब्सिडी से दबाव डाल प्रतिस्पर्धा बर्बाद। निवेशक भागते हैं। नियंत्रण मिला तो महंगाई, ब्लैकमेल, असुरक्षा। असहनीय स्थिति।
अमेरिका परमिट सुधार, ट्रंप स्टॉक, FORGE से उदाहरण। एजेंसियां फंडिंग प्लान साझा करेंगी। ‘नए फ्रेमवर्क साइनिंग आज, अरबों का निवेश।’
यूक्रेन-रूस टीमें लंबे अरसे बाद मिलीं, मुद्दे घटे। पुनर्निर्माण में खनिज महत्वपूर्ण। ईरान वार्ता पर ट्रंप राजी, किंतु सभी मुद्दे जरूरी। साझेदारों की भूमिका सराहनीय—सहकार्य ही रास्ता।