नई दिल्ली। आमड़ा यानी स्पोंडियास पिन्नाटा, जो भारतीय परंपराओं में एक महत्वपूर्ण फल है। आंवले के बाद विटामिन सी का यह बेहतरीन स्रोत पाचन, इम्यूनिटी और त्वचा के लिए वरदान साबित होता है। बिहार सहित देश के कई हिस्सों में इसकी खेती प्राकृतिक रूप से फलती-फूलती है।
छोटे-छोटे हरे-पीले फल खट्टे-मीठे स्वाद से भरपूर होते हैं। इनमें आयरन, कैल्शियम, फाइबर जैसे पोषक तत्व भी मौजूद हैं। भारतीय रसोई में आमड़ा चटनी, अचार व तरकारी के स्वरूप में लोकप्रिय है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके पेड़ आम हैं।
आयुर्वेदिक ग्रंथों में आमड़ा के फल, पत्ती, छाल व बीज का विविध उपयोग वर्णित है। यह पेट के विकार दूर करता है, भूख लगाता है, त्वचा चमकदार बनाता है और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से शरीर की रक्षा करता है। सूजन कम करने वाले तत्व कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक हैं।
गर्मियों का फल होने पर भी अचार बनाकर साल भर संभाल लिया जाता है। बिहार सरकार का वन एवं पर्यावरण विभाग इसकी उपयोगिता पर जागरूकता फैला रहा है। आमड़ा को अपनाकर आप स्वाद और सेहत दोनों हासिल कर सकते हैं।