राजस्थान विधानसभा में बुधवार को राज्यपाल के भाषण पर बहस के दौरान सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच जोरदार ठन गई। युवा बेरोजगारी से लेकर आदिवासी शोषण तक के सवालों ने हंगामा मचा दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शांति धारीवाल ने कौशल विकास पर तीखी बोलचाल में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सदन फट पड़ा।
धारीवाल का कहना था कि युवाओं को प्रशिक्षित न करने से देश की युवा शक्ति बोझ बन जाएगी। गर्ग के व्यंग्य पर उनका पलटवार अभद्र रहा। गर्ग ने इसे पुरानी आदत बताते हुए हटाने की मांग की और स्पीकर ने आदेश जारी किया।
बीएपी के अनिल कटारा ने ‘डबल इंजन’ सरकार पर आदिवासी इलाकों में वनों की तबाही, भूमि अधिग्रहण और भर्तियों में आरक्षण उल्लंघन का इल्जाम लगाया। अलग भील प्रदेश की मांग करते हुए उन्होंने सड़क से सदन तक आंदोलन का एलान किया। रमिला खड़िया ने मंत्री पर नियुक्तियों में भेदभाव, रिश्तेदारों का दबाव, शिक्षक वेतन देरी और पोषण योजनाओं की लापरवाही का आरोप लगाया।
मंत्री ने जांच के लिए समिति का वादा किया। शून्यकाल में भी नोकझोंक चली। आवास योजना पर बहस में मंत्री खर्रा घिरे। लगातार बाधाओं से सदन गुरुवार 11 बजे तक टाल दिया गया।