वॉशिंगटन, 4 फरवरी। क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आपूर्ति श्रृंखलाओं के जोखिमों को दूर करने हेतु वैश्विक सहयोग पर बल दिया। भारत का यह रुख तब सामने आया जब अमेरिका सहयोगी राष्ट्रों से समन्वित व्यापार मॉडल बनाने को कह रहा है।
मंत्री ने वैश्विक निर्भरता की कमियों को रेखांकित किया और संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई। भारत की कोशिशों में नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर, नैतिक व्यापार और ‘फोर्ज’ पहल का समर्थन शामिल हैं।
जे.डी. वेंस ने आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के लिए इन खनिजों की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि सीमित क्षेत्रों पर निर्भरता बाजार विकृतियां पैदा कर रही है। अचानक सप्लाई से कीमतें लुढ़क जाती हैं, निवेश रुक जाता है।
ये देश वैश्विक जीडीपी के दो तिहाई हैं। वेंस का प्रस्ताव है एक सुरक्षित ट्रेड जोन, जहां उत्पादन चरणों पर न्यूनतम मूल्य तय होंगे और टैरिफ से डंपिंग पर अंकुश लगेगा।
इससे स्थिर बाजार, निजी निवेश और लंबी अवधि की योजना संभव होगी। आपात स्थिति में भी आपूर्ति बनी रहेगी। यह गठजोड़ ऊर्जा और तकनीक क्षेत्रों में नया दौर ला सकता है।