मिर्जापुर जिले से उठा मामला पूरे देश को हिला गया है, जहां फिटनेस सेंटर्स के नाम पर युवतियों का शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन का खुलासा हुआ। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन माना है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि एक गिरोह ने जिमों का सहारा लेकर दर्जनों महिलाओं को शिकार बनाया, जिसमें पुलिसकर्मी की भूमिका ने विवाद को और गहरा दिया। इससे न केवल महिलाओं का भरोसा टूटा, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े हुए। मांग की गई है कि पीड़िताओं को न्याय मिले, जांच पारदर्शी हो और फिटनेस सेंटर्स पर सख्त नियंत्रण हो।
प्रियंक कानूनगो की अगुवाई में आयोग ने 1993 अधिनियम के तहत निर्देश जारी किए। सभी प्रांतों के मुख्य सचिवों से नियमावली की जानकारी मांगी गई है। खेल मंत्रालयों से लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण चाहिए।
स्थानीय प्रशासन को 14 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का समय दिया गया। एनएचआरसी ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी साजिशें न हो सकें।