उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की मिसाल पेश की है। स्वदेशी हस्तशिल्प, खादी सामग्री, माटी के खिलौने और स्वसहायता समूहों के उत्पाद मेले की शान बन गए हैं। भक्तों की भारी भीड़ इनकी खरीदारी में जुटी है, जिससे कारीगरों के चेहरे खिले हुए हैं।
स्थानीय उत्पादों को मिले इस प्रोत्साहन से पारंपरिक व्यवसाय नई जान में सांस ले रहे हैं। ग्रामीण इलाकों के शिल्पकारों को यहां अपार संभावनाएं दिख रही हैं, जो उनकी आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित कर रही हैं।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया सकारात्मक है। ‘भारतीय परंपरा से ओतप्रोत ये वस्तुएं श्रेष्ठ हैं,’ कहकर लोग विदेशी माल को ठुकरा रहे हैं। विक्रेता बताते हैं कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और अन्य नीतियों का जादू चल रहा है।
महिला उद्यमी रुकसाना खुश हैं, ‘बिक्री रिकॉर्ड तोड़ रही है। ODOP से क्षेत्रीय उत्पादों का क्रेज बढ़ा है।’ उनका अनुभव मेले की सफलता की कहानी बयां करता है।
खरीदार हिमांशु तिवारी ने कहा, ‘उच्च कोटि के सामान और ढेर सारे विकल्प। यह कारीगरों को सशक्त बना रहा है।’ स्टालों की संख्या में इजाफे से बाजार विस्तृत हुआ है।
यह मेला आस्था का साथी तो है ही, स्वदेशी अर्थव्यवस्था का मजबूत पुल भी साबित हो रहा है। हस्तशिल्पी समुदाय को नई पहचान मिल रही है।