भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौता टेक्सटाइल उद्योग के लिए वरदान साबित हो रहा है। निर्यात पर टैरिफ 50 से घटकर 18 प्रतिशत होने से क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और व्यापार स्थिर होगा, ऐसा विशेषज्ञ बता रहे हैं।
एसआईएमए के महासचिव सेल्वराज ने इसे उद्योग की जीवनरेखा करार दिया। ‘यह दर वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर है, भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।’ यूके, ईयू सौदे व बजट से बढ़ा आत्मविश्वास अब चरम पर है।
डॉ. घुमन ने कहा कि यह सौदा द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहित करेगा, आर्थिक मंदी को दूर भगाएगा। गुणवत्ता पर ध्यान आवश्यक है, जबकि डेयरी-कृषि को संरक्षित रखा गया।
टीईपीआरओसीआईएल के रवि सैम ने पुराने ऊंचे टैरिफ से क्षतिग्रस्त मार्जिन की बात की। नई व्यवस्था से उद्योग पुनरुद्धार की ओर अग्रसर है।
सीए धारीवाल ने समग्र फायदे गिनाए- टेक्सटाइल-कृषि को सीधा लाभ, आईटी-फार्मा को अप्रत्यक्ष स्थिरता। यह डील भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत बनाएगी, रोजगार व विकास सुनिश्चित करेगी।