राज्यसभा के पटल पर कमल हासन ने धमाकेदार प्रवेश किया। तमिलनाडु प्रतिनिधि ने 4 फरवरी को लोकतंत्र, संस्कृति, भाषा और वोटर सूचियों की पोल खोली। राष्ट्रपति के संबोधन पर चर्चा में उन्होंने व्यक्तिगत कहानी को राष्ट्रीय मुद्दों से जोड़ा।
सिनेमा के जरिए परमकुड़ी से संसद तक का सफर बयान किया। राज्यसभा को राज्यों की विविध आवाजों का मंच बताते हुए भावना, विचार और कानून के स्तर पर बात की। मतदाता नामावली में त्रुटियां लाखों को वोट से वंचित कर रही हैं—इन्हें ‘जीवित लाशें’ कहा।
बिहार का हाल गंभीर, बंगाल अदालतों में और तमिलनाडु पर संकट। वोट का अधिकार सर्वोच्च है, तकनीकी चूक से इसे न छीनें। सरकारें क्षणभंगुर हैं, युवा पीढ़ी निगरानी कर रही। तुरंत कदम उठाने की अपील की, इसे वैचारिक टकराव कहा।
संघीय ढांचे के संवैधानिक आदर्श और जमीनी सच्चाई में फर्क पर चर्चा। अन्नादुरई की स्मृति ताजा की, जिन्होंने उन्हें विचारों का उत्तराधिकारी बनाया। गांधी, पेरियार, अन्ना से प्रेरित होकर तर्कपूर्ण बहस का वादा। मंच भय नहीं, स्मृतियों से कांपना।
स्टालिन और मित्र दलों का आभार। तमिल में अंतिम शब्द कहकर संसदीय सफर की शुरुआत की। यह सम्मानजनक अवसर है।