राजस्थान विधानसभा बुधवार को भरतपुर के बेघर परिवारों के सवाल पर उबाल पर आ गई। प्रश्नकाल में आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग के सवाल ने आग लगा दी, जिससे मंत्रियों और विपक्षी दलों के बीच जमकर बहस हुई।
गर्ग ने जिले में बेघरों की तादाद व पीएम आवास योजना के हकदारों पर डेटा मांगा। आवास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कलेक्टर से रिपोर्ट दिलवाने का वादा किया, मगर आंकड़े टाल गए। गर्ग ने साफ-साफ संख्या बताने और बेघर नीति-2022 के सर्वे प्रावधान पर हां-ना जवाब की मांग की।
बहस तब भड़की जब टीकाराम जूली ने मंत्रियों पर व्यंग्य किया- ‘वकीलों का क्या काम यहां।’ जोगाराम पटेल ने उन्हें चुप रहने को कहा। जूली ने पलटकर कहा कि वे हकीकत बयान कर रहे हैं, जबकि बेघरों को घर कब मिलेगा, इस पर मंत्री चुप हैं।
नीति-2022 के मानकों पर उन्होंने सवाल ठोके। राठौड़ ने हस्तक्षेप कर मंत्री की तारीफ की- ‘कोई चालाकी नहीं, पूरा जवाब तैयार है।’ स्पीकर ने उनकी बात को मंजूरी दी।
विपक्ष के विरोध के बीच सदन में कोलाहल मच गया। स्पीकर को बार-बार आह्वान करना पड़ा। राजस्व मंत्री को भी सड़क रिकॉर्ड पर अस्पष्टता के लिए कोसा गया।
यह हंगामा राज्य में आवास योजनाओं की धरातल स्थिति उजागर करता है। गरीबों के घरों का इंतजार कब खत्म होगा, यह सवाल अनुत्तरित है। सरकार को ठोस नीति लागू करने की चुनौती है।