फिल्म ‘आराधना’ का वो आइकॉनिक सीन याद है, जहां राजेश खन्ना जीप में माउथ ऑर्गन बजा रहे हैं? स्टेयरिंग पर सुजीत कुमार थे, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को दोस्ती निभाई और भोजपुरी को नई जिंदगी दी। उत्तर प्रदेश-बिहार के घरों में वे पहले सुपरस्टार बने।
चकिया के किसान परिवार में 1934 में जन्मे सुजीत मूलतः वकील बनने वाले थे। कॉलेज नाटक ने फणी मजूमदार को आकर्षित किया। ‘लाल बंगला’, ‘बिदेसिया’ से पहचान बनी। 1977 का ‘दंगल’ भोजपुरी को बचा गया, पहली कलर फिल्म बनाकर। गीत ‘काशी हिले…’ ने इतिहास रचा।
खन्ना के साथ ‘हाथी मेरे साथी’, ‘अवतार’ में जोड़ी धांसू। पुलिस रोल्स में माहिर। निर्माता बने तो ‘दरार’, ‘चैंपियन’ हिट। ‘पान खाए सैयां…’ में मेहमान स्टार्स ने तहेेदिल से सम्मान दिया।
‘जुहू सर्कल’ में दोस्तों संग जिंदादिली। कैंसर से जूझते 2010 में निधन। उनका योगदान भोजपुरी को हमेशा याद रहेगा।