भारत सरकार ने क्लाउड और डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश को गति देने के लिए विदेशी कंपनियों को 20 वर्षीय कर मुक्ति का ऐलान किया है। वित्त मंत्रालय के बुधवार के बयान से साफ है कि लाभ लेने हेतु चार प्रमुख शर्तें पूरी करनी होंगी, जो 2026-27 से शुरू होकर 2046-47 तक चलेगी।
वैश्विक क्लाउड प्रदाताओं के लिए यह राहत तब मिलेगी जब वे भारत में अधिसूचित हों। डेटा सेंटर सेवाएं भारतीय इकाइयों से ही ग्रहण करनी होंगी, जो मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त हों।
भारतीय उपभोक्ताओं तक सेवाएं पहुंचाने का रास्ता भी देशी रीसेलर से हो। इन शर्तों से विदेशी फर्मों को वैश्विक आय पर भारतीय टैक्स का भय नहीं रहेगा।
देशी कमाई, जैसे स्थानीय डेटा सेंटर्स की फीस या रीसेलर की बिक्री, पर सामान्य कराधान जारी रहेगा। संबद्ध इकाइयों को 15% मार्जिन की छूट दी गई है।
स्वामित्व की परवाह किए बिना सभी डेटा सेंटर्स को बराबर मौका मिलेगा। इससे भारतीय प्रदाता आश्वस्त होकर ग्लोबल क्लाइंट्स को सेवाएं दे सकेंगे।
नीति का लक्ष्य बुनियादी ढांचे का विस्तार, रोजगार वृद्धि और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। भारत अब डेटा पूंजी का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।