भागदौड़ वाली दुनिया में स्वास्थ्य की नींव कमजोर पड़ रही है। प्राकृतिक दिनचर्या प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर संतुलन लौटाती है—बिना कड़े नियमों के।
भोर से पहले जागें, जब हवा शुद्ध होती है। प्राणायाम, योग या भ्रमण से दिन सकारात्मक शुरू होता है। योजनाबद्धता यहीं से आती है।
प्राकृतिक संकेतों का सम्मान करें: भोजन भूख पर, नींद आकांक्षा पर और उत्सर्जन बिना रोक के। इससे विकार रुकते हैं।
दैनिक सफाई जरूरी—दांत ब्रश, जीभ मलना, नहाना और साफ कपड़े। मालिश से शिथिलता दूर, परिसंचरण सक्रिय।
आहार में संयम: उचित समय, पोषक तत्वों से भरपूर, मौसमानुकूल। तले-भुने से परहेज, जल संतुलित पान।
क्रिया और विश्राम में संतुलन। व्यायाम से शक्ति, गहन निद्रा से ताजगी। अनावश्यक दिनसोना न करें।
यह पद्धति तनाव घटाती, ऊर्जा बढ़ाती है—जीवन की सच्ची कुंजी।