भारत-अमेरिका व्यापारिक गठबंधन से अर्थचक्र में नई गति आएगी। टैरिफ में भारी कटौती से करंट अकाउंट डेफिसिट घटेगा, रुपया मजबूत होगा और बाहरी झटकों का असर कम पड़ेगा। एक्सिस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता मध्यम लक्ष्यों को सशक्त बनाएगा।
जिन क्षेत्रों का अमेरिका से सीधा लेना-देना है, जैसे टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, ऑटो एक्सपोर्ट, आईटी और इंडस्ट्री, उन्हें बाजार पहुंच, शुल्क स्थिरता और चेन विश्वसनीयता से लाभ मिलेगा। निर्यात में उछाल, उत्पादन निवेश और एफडीआई में वृद्धि तय है। भविष्य में बेहतर ऑर्डर फ्लो और क्षमता से विकास स्थायी बनेगा।
पुराने टैरिफ झगड़े पीछे छूट गए। अब फोकस सुरक्षित सप्लाई, चीन-विकल्प और साझा हितों पर। भारत की मेक इन इंडिया, पीएलआई व एक्सपोर्ट पुश को बल मिलेगा, जबकि अमेरिका को स्थिर साझेदार।
बाजारों में कंपनियों की आय पर यकीन बढ़ेगा, खासकर एक्सपोर्ट व कैपेक्स सेक्टरों में। भारत निवेशकों का चहेता बनेगा। इसे लंबे सशक्तिकरण के रूप में समझें। मजबूत अमेरिकी उपस्थिति वाली फर्मों को चुनें।