अमेरिकी संसद के सदस्यों ने भारत के साथ नए व्यापारिक समझौते का हर्षोल्लास से स्वागत किया है, इसे लोकतंत्रों के बीच रिश्तों के पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है। इससे द्विपक्षीय व्यापार फलेगा, ऊर्जा क्षेत्र मजबूत होगा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में साझेदारी बढ़ेगी।
राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि टैरिफ युग के बाद यह समझौता महत्वपूर्ण मोड़ है। दोनों अर्थव्यवस्थाओं को हुए नुकसान से उबरते हुए यह साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। भारत एक विश्वसनीय सहयोगी है, जिससे मजबूत व्यापारिक रिश्ते रोजगार, व्यवसाय और प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करेंगे।
स्टीव डेन्स ने ट्रंप-मोदी की जोड़ी की तारीफ की, इसे सर्वांश की जीत बताया। भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिकी निर्यात के द्वार खोलेगी, विशेषकर कृषि और ऊर्जा में। अमेरिकी तेल की ओर भारत का झुकाव रूस को कड़ा संदेश देता है, लेकिन व्यापार असंतुलन सुधार की जरूरत बनी हुई है।
जिम रिश ने समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि कहा, भारत की बाधा हटाने की नीति का अभिनंदन किया। रणनीतिक दृष्टि से यह रूस विरोधी प्रयासों को मजबूत करेगा, यूक्रेन संकट के समाधान में सहायक बनेगा। अमेरिका में बसे लाखों भारतीयों के कारण यह साझेदारी स्वाभाविक है।
लिंडसे ग्राहम ने रूस पर ऊर्जा निर्भर देशों को चेतावनी दी। भारत का कदम सराहनीय है, अन्य को भी ऐसा करना चाहिए। दबाव से रूस बातचीत को तैयार होगा। वाशिंगटन-नई दिल्ली के बीच यह समझौता व्यापारिक, ऊर्जावान और हिंद-प्रशांत रणनीति में नया अध्याय खोलेगा।