राहुल गांधी के संसदीय भाषण में जनरल मनोज नरवणे की किताब के हवाले से हलचल मच गई। रक्षा जानकार पीके सहगल ने इसे सुरक्षा के लिए हानिरहित बताया।
2022 में रिटायर हुए नरवणे पर पांच साल का प्रतिबंध है। सहगल बोले, सरकार का सतर्क रहना जायज है।
डोकलाम विवाद पर किताब के दावे गलत संदर्भ हैं। 73 दिनों में भारत ने चीन को मात दी। उनकी 1962 जैसी धमकियां खोखली साबित हुईं। हम शांति चाहते थे, लेकिन तैयार भी। सिलिगुरी सड़क परियोजना विफल हुई।
नरवणे के भाषणों से किताब लोकप्रिय हुई। सहगल की सलाह- इसे जारी करें, कोई जोखिम नहीं। कैलाश में हमारी स्थिति अटल थी, चीन को देर लगी पीछे हटने में।
गांधी की टिप्पणी विपक्षी रणनीति का हिस्सा लगती है। नरवणे का अग्निवीर विरोध उन्हें सीडीएस से रोक सकता था।
कुल मिलाकर, सहगल का विश्लेषण रक्षा नीतियों में खुलापन का पक्ष लेता है।