देश की राजधानी नई दिल्ली के एनएसआईसी ग्राउंड्स पर 5-8 फरवरी 2026 को भारत कला मेला का 17वां आयोजन होगा। ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस कलाकार ग्रेस लिलियन ली यहां ‘द विंड्स ऑफ गार्डियंस’ के माध्यम से अपनी स्वदेशी कला का प्रदर्शन करेंगी, जो परंपरा और आधुनिकता का अनोखा मेल है।
मिरियम मेर सेमसेप समुदाय से ताल्लुक रखने वाली ग्रेस की कला कम उम्र में सीखी बुनाई पर आधारित है। वे पहचान, भूमि, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी अधिकारों को समसामयिक नजरिए से पेश करती हैं।
कृति में चार हवा रूप—उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम—और ड्रीमवीवर मास्क हैं, जो हवा को गतिशीलता, यादों और विरासत हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में दर्शाते हैं। कॉटन, केन, ऐक्रेलिक और रबर सामग्री से बनी ये रचनाएं टोरेस स्ट्रेट की हवा देवताओं को श्रद्धांजलि हैं।
ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने स्वागत किया, “यह प्रदर्शनी फर्स्ट नेशंस की उत्कृष्टता को भारत में लाने की हमारी कोशिश है। ग्रेस की कला साबित करती है कि पुरखों का ज्ञान नई रचनात्मकता को जन्म देता है।”
भारतीय कलाप्रेमी ऑस्ट्रेलियाई स्वदेशी संस्कृति के करीब आएंगे। ग्रेस बोलीं, “भारत का क्राफ्ट और कहानी कहने का इतिहास अद्भुत है। मैं अपनी बुनाई से पूर्वजों का सम्मान कर रही हूं, सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए भविष्य के स्वप्न बुन रही हूं।”
दौरे में रॉ मैंगो के संजय गर्ग से बातचीत समेत कई आयोजन हैं। यह मेला वैश्विक सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करेगा।