3 फरवरी 1816, भैणी गांव—यहां बाबा राम सिंह का अवतरण हुआ, जिन्होंने पंजाब को ब्रिटिश जंजीरों से आजादी का संदेश दिया। आध्यात्मिक गुरु से क्रांतिकारी बने बाबा ने कूका विद्रोह से साम्राज्य को चुनौती दी।
शिक्षा सीमित रही, हृदय भक्ति में। पिता के बढ़ईगी कार्य से असफलता मिली, सेना में भेजा गया। पेशावर में बालक दास जी की दर्शन से जीवन परिवर्तन। ‘तुम्हारी प्रतीक्षा थी,’ कहकर दीक्षा दी, जो युद्ध से आध्यात्म की ओर ले गई।
1845 में भैणी साहिब में खालसा पंथ की शिक्षा ग्रहण की। सद्गुरु व सुधारक बने। 1857 में नामधारी संप्रदाय स्थापित, जहां भगवान को अंतर्मन में बसाने का संकल्प लिया। लिंग भेद मिटाने, नैतिकता पर बल।
अंग्रेजी वस्तुओं, शिक्षा, मदिरा का पूर्ण बहिष्कार। कूका आंदोलन ने पंजाब हिला दिया। भयभीत अंग्रेजों ने निर्वासन दिया—रंगून, अंडमान। 14 वर्ष यातनाओं के बाद 1885 में स्वर्गवासी। उनका साहस आज भी प्रेरणा स्रोत है।