संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर सत्ताधारी और विपक्ष के बीच तलवारें भिड़ गईं। एक ओर पीएम मोदी सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी के जिया उर रहमान बर्क ने इसे जनघोष का अपमान बताया। आम आदमी ठगा गया है। युवा वर्ग और महिलाओं के लिए कुछ नहीं।
उत्तर प्रदेश में मदरसों पर सरकारी दबाव को बर्क ने उजागर किया। अदालतें हर बार राहत दे रही हैं। आरोप हवा में उछालना बंद करें। समाज की मदद से ये संस्थाएं चल रही हैं।
राहुल गांधी के भाषण ने सबको चौंका दिया। राष्ट्रपति अभिभाषण पर बोलते हुए उन्होंने ऐसी किताब का जिक्र किया जो प्रकाशित ही नहीं हुई। भाजपा के हर्ष मल्होत्रा ने कहा- राहुल को वाक्पटुता का अंदाजा नहीं। वे बस खीझ मिटा रहे हैं।
कंगना रनौत ने हंगामेबाजी को अपराध कहा। सदन का सम्मान खतरे में है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने नियमों की याद दिलाई। क्या कोई किताब लिखकर सदन में आरोप लगाएंगे?
सपा के नीरज मौर्य ने चर्चा रोकने पर सवाल उठाए। जावेद अली खान ने विदेशी फंड पर गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी बताई। अरविंद सावंत ने 2005 के संदर्भों को पुराना करार दिया।
निशिकांत दुबे ने आजादी के दायरे पर जोर दिया। यह विवाद संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है। आगे की बहसें और गरमाई हुई तो लोकसभा ठप हो सकती है।